आज के ताजा मंडी भाव - प्रामाणिक और विश्वसनीय जानकारी
दिनांक: 14-08-2026
चना रबी सीजन की एक महत्वपूर्ण दलहनी फसल है, जो मेड़ता क्षेत्र में बड़े पैमाने पर उगाई जाती है। यह न सिर्फ किसानों की आय का प्रमुख स्रोत है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में भी मदद करता है क्योंकि यह वायुमंडलीय नाइट्रोजन को मिट्टी में स्थिर करने की क्षमता रखता है। सही प्रबंधन से चने की उपज में काफी सुधार किया जा सकता है, आइए इसकी पूरी प्रक्रिया को विस्तार से समझते हैं।
अक्टूबर के मध्य से नवंबर तक चने की बुवाई की जाती है। दोमट मिट्टी जिसमें जल निकासी अच्छी हो, चने के लिए सबसे उपयुक्त होती है। बहुत ज्यादा भारी (चिकनी) मिट्टी में जलभराव की समस्या हो सकती है, जो चने की जड़ों के लिए हानिकारक है।
बुवाई से पहले बीज को उचित फफूंदनाशक और राइजोबियम कल्चर से उपचारित करना जरूरी है, इससे जड़ सड़न और उखटा जैसी बीमारियों से बचाव होता है, साथ ही राइजोबियम कल्चर जड़ों में गांठें बनाकर नाइट्रोजन स्थिरीकरण को बढ़ाता है। कतार से कतार की उचित दूरी बनाए रखते हुए बुवाई करने से पौधों को पूरी धूप और हवा मिलती है।
चने को ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती, यह एक सूखा-सहनशील फसल है। फूल आने के समय और दाना भरते समय हल्की सिंचाई देने से पैदावार बेहतर होती है। ज्यादा सिंचाई करने से पौधों में अनावश्यक बढ़वार होती है जिससे फूल और फली कम बनती है।
चूंकि चना खुद नाइट्रोजन स्थिर करता है, इसलिए इसे ज्यादा नाइट्रोजन खाद की जरूरत नहीं होती। बुवाई के समय हल्की मात्रा में फॉस्फोरस और पोटाश देना फायदेमंद रहता है, जो जड़ विकास और दाना भरने में मदद करता है।
फली छेदक कीट (हेलिकोवर्पा) चने की फसल को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाता है, यह फली के अंदर घुसकर दाना खा जाता है। समय पर निगरानी और जरूरत पड़ने पर उचित कीटनाशक छिड़काव से नुकसान को कम किया जा सकता है। उखटा रोग से बचाव के लिए बीज उपचार और फसल चक्र अपनाना कारगर उपाय है।
बुवाई के 30-45 दिन के बीच एक या दो बार निराई-गुड़ाई करने से खरपतवार नियंत्रित रहते हैं और पौधों को पूरा पोषण मिलता है।
जब पौधे और फलियां सूखकर भूरे रंग की हो जाएं, तब कटाई करनी चाहिए। कटाई के बाद दानों को अच्छी तरह सुखाकर, साफ करके ही मंडी लाएं - इससे बेहतर गुणवत्ता श्रेणी में भाव मिलने की संभावना बढ़ जाती है। नमी की मात्रा तय सीमा से ज्यादा होने पर मंडी में कम भाव मिलने का खतरा रहता है।
चने की बुवाई कब करनी चाहिए?
अक्टूबर के मध्य से नवंबर तक चने की बुवाई का सबसे उपयुक्त समय माना जाता है।
चने की फसल में सबसे ज्यादा नुकसान कौन सा कीट करता है?
फली छेदक कीट (हेलिकोवर्पा) चने की फसल को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाता है।
क्या चने की फसल को ज्यादा सिंचाई चाहिए?
नहीं, चना एक सूखा-सहनशील फसल है और इसे सिर्फ फूल व दाना भरने के समय हल्की सिंचाई की जरूरत होती है।
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